रीट एग्जाम से पहले फटा बच्चेदानी का ट्यूब, रात में हुआ ऑपरेशन…और फिर परीक्षा देने पहुंची आबिदा

डॉक्टरों ने रात में महिला का ऑपरेशन किया और दोपहर में महिला व्हीलचेयर पर बैठकर रीट परीक्षा दे रही थी। झुंझुनूं जिले में आबिदा बानो के साहस की चौतरफा तारीफ हो रही है, जानिए पूरी कहानी…

Jhunjhunu fallopian tube burst before Reet exam operation done Abida Bano gave exam on wheelchair

परीक्षा देने जाती हुई महिला – फोटो

राजस्थान में रीट परीक्षा के दौरान एक महिला व्हीलचेयर पर परीक्षा देने पहुंच गई। खास बात यह है कि महिला दिव्यांग नहीं थी। परीक्षा से एक रात पहले उसका ऑपरेशन हुआ था और सामान्य स्थिति में उसे अस्पताल में बेड पर होना चाहिए था। लेकिन रीट परीक्षा होने के कारण महिला परीक्षा केंद्र पहुंच गई और पेपर भी दिया।

जिले में आबिदा बानो ने अदम्य साहस और संकल्प की मिसाल पेश की। अचानक बच्चेदानी की ट्यूब फटने के कारण उनका ऑपरेशन हुआ, लेकिन मजबूत इच्छाशक्ति के चलते वह व्हीलचेयर पर रीट परीक्षा देने पहुंचीं।

डॉ. अर्षा चौधरी ने एडीएम से विशेष अनुमति लेकर परीक्षा की स्वीकृति दिलाई। अस्पताल से एक नर्सिंग स्टाफ को सेंटर पर भेजा गया और दर्द न हो इसके लिए महिला को इंजेक्शन दिया गया।

परीक्षा केंद्र पर महिला अभ्यर्थियों का संघर्ष
राजस्थान में 27-28 फरवरी को रीट परीक्षा का आयोजन किया गया था। परीक्षा केंद्रों पर कड़ी व्यवस्थाओं के चलते कई महिला अभ्यर्थियों को परेशानी हुई। चूड़ियां, नोजपिन और दुपट्टे उतरवाए गए। देरी से पहुंचने पर कई अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिली, जिससे कुछ महिलाएं भावुक हो गईं। झुंझुनूं के चिड़ावा कस्बे में महिला अभ्यर्थी प्रियंका अपने तीन माह के शिशु को गोद में लेकर परीक्षा देने पहुंची। हालांकि, परिजनों ने उन्हें हौसला दिया।

दो पारियों में हुई परीक्षा
राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा (रीट) गुरुवार को राज्य में पहले दिन दो पारियों में संपन्न हुई। अधिकारियों के अनुसार, रीट परीक्षा जयपुर के 220 परीक्षा केंद्रों पर पहली पारी में सुबह 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक आयोजित की गई थी। दूसरी पारी अपराह्न 3 बजे से शाम 5:30 बजे तक हुई। दूसरी पारी शहर के 233 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई।

परीक्षा केंद्रों पर बड़ी संख्या में उम्मीदवार निर्धारित ड्रेस कोड का पालन किए बिना पहुंचे जिसके कारण उन्हें परीक्षा केंद्रों में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई। कई उम्मीदवारों ने ड्रेस कोड का पालन करने के लिए आखिरी समय में बदलाव किए, जबकि कुछ अभ्यर्थी देरी से पहुंचे, जबकि कुछ को सुरक्षा कारणों से प्रवेश नहीं दिया गया। 

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