सूरापुर | होली का त्योहार नजदीक आते ही फिजाओं में फागुन का रंग घुलने लगा है। इसी कड़ी में आज सूरापुर पुरानी बाजार में होली से पूर्व पारंपरिक ‘फागुवा’ का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र रहा, जिसमें स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पारंपरिक फाग के गीतों पर जमकर आनंद उठाया।सूरापुर में फागुवा गाने और मनाने की यह परंपरा कोई नई नहीं है, बल्कि यह कई दशकों से अनवरत चली आ रही है। आधुनिकता के इस भागदौड़ भरे दौर में भी यहां के निवासी अपनी लोक-संस्कृति और पूर्वजों की धरोहर को सजीव रखे हुए हैं। ढोल, मंजीरे और हारमोनियम की थाप पर गाए गए फागुवा के पारंपरिक गीतों ने पूरे माहौल को होलीमय कर दिया।इस ऐतिहासिक परंपरा के बारे में बात करते हुए स्थानीय निवासी बब्लू बरनवाल ने बताया कि”यह फागुवा हमारे बाबा-दादा के जमाने से होता आ रहा है। यह हमारी पुरानी विरासत है जिसे हमारे पूर्वजों ने शुरू किया था। आज हम लोग भी उसी उत्साह और उमंग के साथ इस परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं।”इस तरह के आयोजन न केवल हमारी लुप्त हो रही लोक कलाओं को जीवित रखते हैं, बल्कि समाज में आपसी भाईचारे और सौहार्द का संदेश भी देते हैं। फागुवा के इस कार्यक्रम ने सूरापुर में होली के उत्साह को कई गुना बढ़ा दिया है और युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़े रखने का एक बेहतरीन काम किया है।






