अमेरिकी ट्रंप प्रशासन में सरकारी दक्षता विभाग (DOGE) का नेतृत्व कर रहे एलन मस्क लगातार कई बड़े फैसले ले रहें हैं। इसी दौरान अब उन्होंने भी अमेरिकी संघीय कर्मचारियों को लेकर एक नया आदेश जारी कर दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के सलाहकार और टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने शनिवार 22 फरवरी को कहा कि यदि सभी अमेरिकी संघीय कर्मचारी अपने कार्य सप्ताह का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत करने में असफल होते हैं तो उनकी नौकरी जा सकती है।
क्या है मस्क का निर्देश?
हाल ही में शुक्रवार 21 फरवरी को घोषित नवीनतम कटौतियों में अमेरिकी रक्षा विभाग को अगले सप्ताह से अपने असैन्य कर्मचारियों की संख्या में कम से कम पांच प्रतिशत की कटौती करने का निर्देश दिया गया है। ट्रंप प्रशासन ने पहले ही कई अन्य संघीय कर्मचारियों को नौकरी से निकालना शुरू कर दिया है।
सोशल मीडिया पर किया था ऐलान
सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर एलन मस्क ने कहा, “राष्ट्रपति के निर्देशों के अनुरूप सभी संघीय कर्मचारियों को शीघ्र ही एक ईमेल प्राप्त होगा, जिसमें यह पूछा जाएगा कि पिछले सप्ताह उन्होंने क्या किया? जवाब न देने पर इस्तीफा माना जाएगा”।
हालांकि मस्क ने ये साफ तरह से नहीं बताया है कि इसमें कर्मचारियों को क्या करना जरूरी रहेगा और इसके लिए समय सीमा कितनी होगी। मस्क को अमेरिकी सरकार के खर्च और अपव्यय को कम करने में मदद करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने मस्क से अधिक आक्रामक होने को कहा
राष्ट्रपति ट्रंप के सलाहकार और टेस्ला के सीईओ एलन मस्क का कार्य लेखा-जोखा के बारे में नया निर्देश ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि मस्क बहुत अच्छा काम कर रहे हैं लेकिन उन्हें अधिक आक्रामक होने की आवश्यकता है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा था, “एलन बहुत बढ़िया काम कर रहे हैं, लेकिन मैं उन्हें और आक्रामक होते देखना चाहूंगा। याद रखें, हमें एक देश बचाना है, लेकिन आखिरकार उसे पहले से कहीं ज़्यादा बेहतर बनाना है। MAGA!”
ट्रंप प्रशासन ने 20 लाख से अधिक कर्मचारियों को भेजा था नोटिस
ट्रंप प्रशासन ने जनवरी के अंत में 20 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों को भेजा था नोटिस, जिसमें मुआवजे के तौर पर 8 महीने के वेतन के बदले उन्हें स्वेच्छा से इस्तीफ़ा देने की पेशकश की गई थी। आपको बता दें की इस आदेश को सरकारी क्षेत्र की चार यूनियन और 20 डेमोक्रेट वकीलों ने कोर्ट में चुनौती दी थी। छह फरवरी को एक संघीय जज ने इसे लागू होने पर रोक लगा दी थी।








