शाहगंज। गुरुवार को नगर के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में उस समय भक्ति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब प्रसिद्ध संत एवं प्रवचनकार पूज्य राजन महाराज जी का भव्य आगमन हुआ। विशाल धर्मसभा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और महाराज जी के मुखारविंद से सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलयुग का विस्तारपूर्वक वर्णन सुना।महाराज जी के आगमन पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। रामलीला मैदान पूरी तरह सजाया गया था और वातावरण भक्ति गीतों व जयघोष से गूंज उठा।अपने प्रवचन में महाराज जी ने कहा कि सनातन धर्म में समय को चार युगों में विभाजित किया गया है, जिनमें प्रत्येक युग का अपना अलग महत्व और स्वरूप है।उन्होंने बताया कि सतयुग सत्य और धर्म का युग था। उस समय मनुष्य पूर्ण रूप से धर्म का पालन करता था और समाज में छल, कपट व अधर्म का अस्तित्व नहीं था। सत्य, तप, दया और पवित्रता जीवन का आधार थे।इसके पश्चात उन्होंने त्रेतायुग का वर्णन करते हुए कहा कि इस युग में धर्म तीन चरणों पर रह गया था। भगवान श्रीराम ने इसी युग में अवतार लेकर मर्यादा और आदर्श जीवन का संदेश दिया। राम-रावण युद्ध और रामराज्य की स्थापना त्रेतायुग की प्रमुख घटनाएँ रहीं।द्वापरयुग में धर्म दो चरणों पर रह गया था और अधर्म बढ़ने लगा था। इसी काल में भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लिया और महाभारत का युद्ध हुआ। श्रीमद्भगवद्गीता का दिव्य उपदेश भी इसी युग में दिया गया।वर्तमान समय को कलयुग बताते हुए महाराज जी ने कहा कि आज धर्म केवल एक चरण पर टिका है। समाज में लोभ, मोह और स्वार्थ की प्रवृत्ति बढ़ी है, लेकिन इस युग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि भगवान के नाम-स्मरण और सच्ची भक्ति से ही मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है।प्रवचन के दौरान श्रद्धालु भावविभोर नजर आए। कार्यक्रम के अंत में भजन-कीर्तन और आरती के साथ आयोजन का समापन हुआ। आयोजकों ने बताया कि इस आध्यात्मिक आयोजन से नगरवासियों में नई चेतना और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ है।






