पंजाब में इस हफ्ते मूसलाधार बारिश और सतलुज–ब्यास–रावी–घग्गर नदियों के उफान के साथ भाखड़ा, पोंग और रणजीत सागर बांधों से नियंत्रित पानी छोड़ने के कारण दशकों की सबसे भीषण बाढ़ आ गई, सभी 23 ज़िले प्रभावित हैं और मौतों का आंकड़ा 30–37 के बीच बताया जा रहा है। 1,400–1,650 गाँव जलमग्न हुए, लगभग 1.75 लाख एकड़ से अधिक खेती डूब गई और 3–3.5 लाख से अधिक लोग संकट से प्रभावित हुए; सेना, वायु सेना, NDRF और BSF के साथ बड़े पैमाने पर बचाव जारी है।सबसे अधिक असर गुरदासपुर, अमृतसर, फिरोज़पुर, फ़ाज़िल्का, पठानकोट और कपूरथला में दिखा, जहाँ सैकड़ों गाँवों में पानी भर गया और फसलों को बड़ा नुकसान हुआ; कई जगहों पर पटियाला और जालंधर तक सतलुज के फैलाव का असर दर्ज हुआ। सरकार ने राहत शिविर खोले, तटीय/निम्न इलाक़ों के लोगों को अलर्ट पर रखा और सभी शिक्षण संस्थान 7 सितंबर तक बंद रखने के निर्देश दिए हैं।मौसम विभाग के अनुसार 4–8 सितंबर के बीच बारिश में कमी की प्रवृत्ति दिख सकती है, हालांकि हल्की–मध्यम वर्षा की संभावना बनी रहेगी; प्रशासन ने नदी किनारे बसे इलाक़ों में सतर्कता और आवश्यकता पर तुरंत निकासी की अपील की है। खेतों में धान सहित बड़ी फसल हानि के संकेत हैं, जिससे आजीविका पर असर और खरीफ आपूर्ति की चिंता बढ़ी है; केंद्र और राज्य स्तर पर मंत्रियों/अधिकारियों के दौरे व सहायता का आश्वासन दिया गया है ।सीमा-पार परिप्रेक्ष्य में पाकिस्तान के पंजाब में भी भारी विस्थापन और अलर्ट जारी हैं, क्योंकि साझा नदियों में ऊपरी जलग्रहण में वर्षा और प्रवाह बढ़ने से हालात गंभीर बने हुए हैं; भारत की ओर से बार–बार बाढ़ चेतावनियाँ और जल–प्रवाह सूचना साझा होने की खबरों के बीच विशेषज्ञों ने “जानबूझकर पानी छोड़े जाने” के आरोपों से इनकार किया है। अंतरिम रूप से, प्रशासन का जोर त्वरित राहत, सुरक्षित निकासी, तटबंधों की निगरानी और जल–निकासी बहाली पर है, जबकि जैसे–जैसे बारिश घटेगी, क्षति–आकलन और पुनर्स्थापन कदम तेज किए जाएंगे।
सलमान शेख






