रूस से तेल आयात करने के मामले में अमेरिका और यूरोपीय संघ की तरफ से सवाल उठाए जाने को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता ने प्रतिक्रिया दी है।

रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट के जरिए कहा है, “यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से रूस से तेल आयात करने के मुद्दे पर अमेरिका और यूरोपीय संघ की तरफ से भारत को निशाना बनाया गया है. वास्तव में भारत ने रूस से तेल इसलिए आयात शुरू किया क्योंकि संघर्ष के बाद पारंपरिक सप्लाई यूरोप की ओर मोड़ दी गई थी.”“उस समय अमेरिका ने ख़ुद भारत को ऐसे आयात के लिए प्रोत्साहित किया था ताकि दुनिया के तेल बाज़ार की स्थिरता मज़बूत बनी रह सके.”रणधीर जायसवाल ने लिखा है, “भारत अपने उपभोक्ताओं के लिए सस्ती और स्थिर ऊर्जा मुहैया कराने के लिए आयात करता है. यह वैश्विक बाज़ार के हालात की मजबूरी है. लेकिन यह उल्लेखनीय है कि जो देश भारत की आलोचना कर रहे हैं, वे ख़ुद रूस के साथ व्यापार कर रहे हैं. भारत की तरह उनका यह व्यापार उनके देश के लिए कोई ज़रूरी मज़बूरी भी नहीं है।”रणधीर जायसवाल का कहना है कि यूरोप-रूस व्यापार में केवल ऊर्जा ही नहीं, बल्कि उर्वरक, खनिज उत्पाद, केमिकल, लोहा और इस्पात के साथ ही मशीनरी और परिवहन के सामान भी शामिल हैं। उन्होंने कहा है, “जहां तक अमेरिका का सवाल है, वह अपने परमाणु उद्योग के लिए अब भी रूस से यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, अपनी इलेक्ट्रिक वाहन इंडस्ट्री के लिए पैलेडियम, उर्वरक और रसायन आयात करता है।”रणधीर जायसवाल का कहना है कि इसलिए भारत को निशाना बनाना अनुचित और तर्कहीन है। “किसी भी प्रमुख अर्थव्यवस्था की तरह, भारत भी अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।”

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