दिल्ली के पीतमपुरा निवासी आशीष और वंदना जैन ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अपना पांच महीने का भ्रूण AIIMS को दान कर दिया है। यह AIIMS के 28 साल के इतिहास में पहली बार भ्रूण दान का मामला है, जो चिकित्सा जगत के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।32 वर्षीय वंदना जैन का रूटीन चेकअप के दौरान पता चला कि भ्रूण में हृदय की धड़कन नहीं है, जिसके बाद गर्भपात हो गया। इस कठिन घड़ी में परिवार ने अपने दुःख को समाज की सेवा में बदलने का साहसिक निर्णय लिया। आशीष जैन के पिता सुरेश जैन, जो आगम श्री फाउंडेशन के अध्यक्ष हैं और अंगदान के क्षेत्र में कार्य करते हैं, ने परिवार का मार्गदर्शन किया।दधीचि देहदान समिति के उपाध्यक्ष सुधीर गुप्ता के अनुसार, समिति के 28 साल के इतिहास में यह पहला भ्रूण दान है। समिति ने अब तक 1,732 नेत्रदान, 550 पूर्ण शरीर दान और 42 त्वचा दान देखे हैं, लेकिन भ्रूण दान पहली बार हुआ है।AIIMS के एनाटॉमी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर सुब्रत बासु रॉय के अनुसार, यह दान मेडिकल रिसर्च और शिक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।भ्रूण अध्ययन से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि मानव शरीर के अंग विभिन्न चरणों में कैसे विकसित होते हैं और उम्र बढ़ने के साथ टिश्यू में क्या परिवर्तन आते हैं। इससे अल्जाइमर, पार्किंसन और नवजात एनेस्थीसिया जैसी गंभीर बीमारियों पर गहराई से रिसर्च हो सकेगी।7 सितंबर 2025 को सुबह 8 बजे शुरू हुई यह प्रक्रिया शाम 7 बजे तक पूरी हुई, जिसमें सभी दस्तावेजी औपचारिकताएं पूरी की गईं। दधीचि देहदान समिति के जी.पी. तायल ने AIIMS के साथ समन्वय किया और रोहिणी के नर्सिंग होम से भ्रूण को AIIMS तक पहुंचाने की व्यवस्था की।यह दान न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान को नई दिशा देगा बल्कि भविष्य के डॉक्टरों की शिक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।जैन परिवार का यह कदम मानवता, संवेदना और वैज्ञानिक सोच का प्रतीक बन चुका है।






