बरही महोत्सव में जगह-जगह भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को दर्शाती झांकियां सजाई जाती हैं। इन झांकियों के माध्यम से श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप और उनकी मनमोहक लीलाओं का जीवंत चित्रण किया जाता है। झांकियों को देखने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु सूरापुर पहुंचते हैं। धार्मिक वातावरण और सजीव प्रस्तुतियां लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।भंडारे, जागरण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से भक्तिमय होता है माहौलदो दिवसीय बरही महोत्सव के दौरान विभिन्न स्थानों पर भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाता है। इसके साथ ही रात में जागरण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी होता है। धार्मिक आयोजनों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से पूरे सूरापुर क्षेत्र में भक्ति और उत्सव का माहौल बना रहता है।दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालुसूरापुर का बरही महोत्सव क्षेत्र की पुरानी धार्मिक परंपराओं में शामिल है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की झांकियों और महोत्सव के अन्य कार्यक्रमों का आनंद लेने पहुंचते हैं। आयोजकों और स्थानीय लोगों के सहयोग से बाजार को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है, जिससे महोत्सव की भव्यता और बढ़ जाती है।वर्ष 1961 से चली आ रही यह परंपरा आज भी सूरापुर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती प्रदान कर रही है। श्रीकृष्ण के बरही महोत्सव में उमड़ने वाली श्रद्धा और उत्साह इस आयोजन को खास बनाती है।






