पत्रकार राजीव प्रताप उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के स्वतंत्र डिजिटल मीडिया पत्रकार थे, जो ‘दिल्ली उत्तराखंड लाइव’ नाम के यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर सक्रिय थे। उन्होंने उत्तरकाशी और स्थानीय मुद्दों—खासकर जिला अस्पताल की बदहाली और सरकारी भ्रष्टाचार—को लेकर कई रिपोर्टिंग की थी। 18 सितंबर 2025 की रात वे अपने दोस्त की गाड़ी लेकर निकले, जिसके बाद से वे लापता हो गए। परिजनों द्वारा गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद तलाश शुरू हुई, और 28 सितंबर को उनका शव उत्तरकाशी के जोशियाड़ा बैराज से मिला।परिवार और पत्नी का आरोप है कि अस्पताल की बदहाली पर वीडियो जारी करने के बाद से राजीव प्रताप को धमकियाँ मिल रही थीं और वीडियो हटाने का दबाव बनाया जा रहा था। यह भी आरोप है कि स्थानीय स्तर पर शक्तिशाली लोगों के भ्रष्टाचार को उजागर करने के कारण उन्हें जान का खतरा था। कार भागीरथी नदी के पास मिली थी, लेकिन उसमें राजीव मौजूद नहीं थे। शव मिलने के बाद पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग पत्रकार संगठनों और मीडिया समुदाय ने की है।राज्य सरकार के निर्देश पर पुलिस और एनडीआरएफ आदि टीमें तलाशी अभियान में लगी थीं। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने प्रकरण की गहन जांच के आदेश दिए हैं और मीडिया जगत में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। राजीव प्रताप पत्रकारिता की पढ़ाई इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (IIMC) से कर चुके थे, और उनकी रिपोर्टिंग का स्थानीय समाज पर व्यापक असर था।पूरा मामला अभी जांच के दायरे में है, कई सवाल अनसुलझे हैं कि उनकी मौत हादसा थी या हत्या। लापता होने के लगभग दस दिन बाद उनका शव बरामद होने की वजह से हत्या की आशंका और परिवार के आरोपों को बल मिला है।






