3 फरवरी 2025 की सुबह पूरी दुनिया पर भारी पड़ा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फैसला।
ट्रंप ने कनाडा, मैक्सिको, और चीन से अमेरिका जाने वाले सामानों पर नए टैरिफ लगाने का किया एलान। इस फैसले के बाद ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट भूचाल आ गया। इससे दुनियाभर की ऑटो कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट आई। साथ ही, करेंसी मार्केट में भी भूचाल आ गया।
करेंसी मार्केट में 20 साल की सबसे बड़ी गिरावट
भारतीय रुपया (INR)- रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 67 पैसे गिरकर 87.29 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आया।
जानिए इस गिरावट से क्या होगा देश और लोगों पर असर
कनाडाई डॉलर (CAD):- कनाडाई डॉलर 20 वर्षों के निचले स्तर पर आ गया, जो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 1.3% गिरा।
मैक्सिकन पेसो (MXN):- मैक्सिकन पेसो में भी महत्वपूर्ण गिरावट दर्ज की गई, जो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 2% से अधिक कमजोर हुआ।
यूरो (EUR):- यूरो 1.3% गिरकर 1.0224 डॉलर पर आ गया, जो इसके मूल्य में सबसे बड़ी गिरावट आई।
चीनी युआन (CNY):- ऑफशोर चीनी युआन 0.5% गिरकर 7.35 प्रति अमेरिकी डॉलर पर आ गया।
जापानी येन (JPY):- जापानी येन में भी गिरावट देखी गई, जो 155.54 प्रति डॉलर के स्तर पर आ गया है।
क्यों इतनी तेजी अमेरिकी डॉलर में? निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की ओर रुख किया, जिससे डॉलर की मांग बढ़ी और यह अन्य करेंसी क्रैश हो गई है।
अब होगा क्या?
ट्रंप ने कनाडा और मैक्सिको से इंपोर्ट पर 25% और चीन से इंपोर्ट पर 10% लगाने का फैसला लिया, जिससे ग्लोबल बिजनेस युद्ध की आशंकाएं बढ़ गईं।
कीमतों में गिरावट- मक्का, गेहूं, और सोयाबीन जैसी कृषि कमोडिटी की कीमतों में गिरावट और आ सकती है। मेटल और क्रूड- तांबा, एल्यूमीनियम, और जस्ता जैसी मेटल की कीमतों में गिरावट आई। इससे और दबाव बढ़ सकता है।
इन टैरिफ्स के चलते, ग्लोबल आर्थिक मंदी और महंगाई ढ़ने की चिंताएं बढ़ गई हैं। एक्सपर्ट्स का का मानना है कि यदि यह ट्रेड वॉर जारी रहता है, तो यह ग्लोबल सप्लाई चेन में परेशानियां आएंगी। जिससे दुनियाभर के बिजनेस पर सीधा असर होगा।








