सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार 25 मार्च को इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस विवादित फैसले पर रोक लगा दी जिसमें कहा गया था कि ‘स्तन पकड़ना’ और पजामे का नाड़ा तोड़ना बलात्कार या बलात्कार का प्रयास नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश का स्वत: संज्ञान लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस फैसले में संवेदनशीलता की कमी है।
उत्तर प्रदेश में नाबालिग लड़की के साथ रेप की कोशिश से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के विवादित बयान पर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया। कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने चिंता जाहिर की है। कोर्ट ने कहा कि जिस तरह के शब्द का इस्तेमाल किया गया यह चिंता का विषय है। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार सहित अन्य को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। बता दें कि 17 मार्च को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले में कहा था कि “पीड़ित के स्तन को पकड़ना, और पजामे के नाड़े को तोड़ने के आरोप के चलते ही आरोपी के खिलाफ रेप की कोशिश का मामला नहीं बन जाता”।
जस्टिस भूषण आर गवई ने सुनवाई के दौरान कहा कि हमें एक जज द्वारा ऐसे कठोर शब्दों का प्रयोग करने के लिए खेद है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने हाईकोर्ट के आदेश को देखा है और हाईकोर्ट के आदेश के कुछ पैराग्राफ जैसे 24, 25 और 26 में जज द्वारा संवेदनशीलता की पूर्ण कमी दर्शाई है। ऐसा भी नहीं है कि फैसला जल्दबाजी में लिया गया है। इस मामले में सुनवाई पूरी होकर निर्णय रिजर्व होने के 4 महीने बाद फैसला सुनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पीड़िता की मां ने भी अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उसकी याचिका को भी इसके साथ ही जोड़ा जाए, उससे दोनों पर साथ में ही सुनवाई आगे बढ़ेगी।








