एप्स्टीन फाइल्स का वो काला सच जिसने दुनिया के सबसे ताकतवर लोगों की नींद उड़ा दी है

अमेरिका की एक अदालत से जारी हुए हजारों पन्नों के दस्तावेजों ने पूरी दुनिया में हड़कंप मचा दिया है। जिसे अब तक ‘साजिश’ या सिर्फ अफवाह माना जाता था, वो अब लिखित रूप में सामने आ गया है। हम बात कर रहे हैं जेफ्री एप्स्टीन की उस कुख्यात ‘लिस्ट’ की, जिसके बाहर आते ही दुनिया के कई रसूखदार, राजनेता, हॉलीवुड स्टार्स और शाही परिवार के लोगों के पसीने छूट रहे हैं। यह मामला सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है क्योंकि इसमें शामिल नाम कोई आम लोग नहीं हैं।जेफ्री एप्स्टीन, जो एक अरबपति फाइनेंसर था और अब इस दुनिया में नहीं है, उसने सेक्स ट्रैफिकिंग का एक ऐसा जाल बुना था जिसमें दुनिया के सबसे ताकतवर लोग फंसते चले गए। हाल ही में कोर्ट के आदेश पर एप्स्टीन की सहयोगी रही घिस्लेन मैक्सवेल के मुकदमे से जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक किया गया है। इन फाइलों में उन लोगों के नामों का जिक्र है जो एप्स्टीन के संपर्क में थे, उसकी पार्टियों में जाते थे या उसके प्राइवेट जेट और प्राइवेट आइलैंड पर गए थे। लेकिन यहाँ यह समझना बहुत जरूरी है कि लिस्ट में नाम होने का मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति ने अपराध किया है, लेकिन यह जरूर साबित होता है कि इन दिग्गजों का उठना-बैठना एक ऐसे अपराधी के साथ था जो नाबालिग लड़कियों का शोषण करता था।इन दस्तावेजों में सबसे चौंकाने वाले नाम अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपतियों और ब्रिटेन के शाही परिवार से जुड़े हैं। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन का नाम इन फाइलों में कई बार आया है। हालांकि, उन पर किसी अपराध का सीधा आरोप नहीं है, लेकिन गवाहों के बयानों के मुताबिक वे एप्स्टीन के काफी करीबी थे। वहीं, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का नाम भी दस्तावेजों में है, लेकिन उन पर भी एप्स्टीन के आइलैंड जाने या किसी गलत काम का आरोप नहीं लगा है। सबसे गंभीर आरोप ब्रिटेन के प्रिंस एंड्रयू पर लगे हैं। दस्तावेजों में एक पीड़िता ने विस्तार से बताया है कि कैसे लंदन और एप्स्टीन के प्राइवेट आइलैंड पर उसके साथ गलत काम किया गया। इन खुलासों ने ब्रिटिश राजशाही की छवि को गहरा धक्का पहुँचाया है।हैरानी की बात यह है कि इस लिस्ट में सिर्फ राजनेता ही नहीं, बल्कि विज्ञान और मनोरंजन जगत की हस्तियां भी शामिल हैं। मशहूर वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग और पॉप स्टार माइकल जैक्सन का नाम भी चर्चा में आया है, हालांकि इनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है कि वे किसी गलत गतिविधि में शामिल थे। ये दस्तावेज बताते हैं कि एप्स्टीन ने पैसे और पावर का इस्तेमाल करके एक ऐसा सिस्टम बना रखा था जहाँ कानून भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ पा रहा था।जेफ्री एप्स्टीन के दस्तावेजों के दूसरे और ताजा सेट ने भारतीय राजनीति और उद्योग जगत में हलचल तेज कर दी है। हाल ही में जारी हुई नई फाइलों और ईमेल एक्सचेंजों में भारत के कुछ बेहद हाई-प्रोफाइल नामों का जिक्र सामने आया है, जिनमें रिलायंस एडीए ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी शामिल हैं। इसके अलावा, दस्तावेजों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम का भी संदर्भ (Reference) मिला है। हालांकि, इन नामों के सामने आने की कहानी वैसी नहीं है जैसा सोशल मीडिया पर अफवाहों में बताया जा रहा है। हमारी पड़ताल में इन नामों के पीछे की पूरी सच्चाई कुछ और ही निकलकर आई है।अनिल अंबानी और एप्स्टीन के बीच क्या थी बात?ताजा दस्तावेजों के मुताबिक, अनिल अंबानी और जेफ्री एप्स्टीन के बीच कथित तौर पर ईमेल के जरिए बातचीत हुई थी। इन ईमेल्स में किसी भी तरह की ‘पार्टी’ या अनैतिक गतिविधियों का जिक्र नहीं है, बल्कि यह विशुद्ध रूप से बिजनेस और नेटवर्किंग से जुड़ी बातचीत लगती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, एप्स्टीन खुद को एक ग्लोबल कनेक्टर के तौर पर पेश करता था और अनिल अंबानी कथित तौर पर उसके जरिए अमेरिका के प्रभावशाली लोगों से जुड़ना चाहते थे। दस्तावेजों में यह भी दावा किया गया है कि एप्स्टीन ने अनिल अंबानी को अमेरिकी निवेश और रणनीतिकारों से मिलवाने की बात कही थी। यानी, उनका नाम ‘क्लाइंट’ या अपराधी के तौर पर नहीं, बल्कि एक बिजनेस कांटेक्ट के रूप में डायरी में मिला है।हरदीप सिंह पुरी का नाम क्यों आया?इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला नाम केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का है। सामने आए दस्तावेजों में यह दावा किया गया है कि 2014 के आसपास, जब वे संयुक्त राष्ट्र (UN) से जुड़े कार्यों के लिए विदेश में सक्रिय थे, तब उनकी एप्स्टीन से मुलाकात हुई थी। रिपोर्ट्स बताती हैं कि एप्स्टीन ने एक लंच मीटिंग के दौरान हरदीप पुरी से मुलाकात की थी। हालांकि, इन मुलाकातों का मकसद भारत में निवेश और ग्लोबल नेटवर्किंग बताया गया है। दस्तावेजों में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि हरदीप पुरी, एप्स्टीन के प्राइवेट आइलैंड पर गए थे या किसी गलत गतिविधि में शामिल थे।प्रधानमंत्री मोदी के नाम का क्या है सच?दस्तावेजों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम भी दिखाई दिया है, लेकिन यह सबसे ज्यादा समझने वाला विषय है। पीएम मोदी का एप्स्टीन से कभी कोई सीधा संपर्क नहीं रहा। एप्स्टीन ने अपने कुछ साथियों को भेजे ईमेल में सिर्फ यह ‘डींग’ हांकी थी कि वह भारत के प्रधानमंत्री के अमेरिका या इजरायल दौरे के दौरान कुछ मीटिंग्स फिक्स करवा सकता है। इसे एप्स्टीन की “बढ़ा-चढ़ाकर बोलने की आदत” माना जा रहा है, ताकि वह अपने क्लाइंट्स को अपनी झूठी ताकत दिखा सके। भारत सरकार और विदेश मंत्रालय ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे “एक अपराधी की बकवास” (Trashy ruminations) करार दिया है और कहा है कि पीएम मोदी का इस शख्स से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं था।यह पूरा मामला तब खुला जब वर्जीनिया जुफ्रे नाम की एक पीड़िता ने साहस दिखाते हुए एप्स्टीन की साथी घिस्लेन मैक्सवेल के खिलाफ मुकदमा दायर किया। वर्जीनिया का आरोप था कि उसे कम उम्र में ही इस देह व्यापार के नरक में धकेल दिया गया था। इतने सालों तक अमीर और ताकतवर लोग वकीलों की फौज और पैसे के दम पर इन बातों को दबाते रहे, लेकिन अब जब जज ने इन सील बंद लिफाफों को खोलने का आदेश दिया, तो सच बाहर आ ही गया।आज भले ही जेफ्री एप्स्टीन जिंदा नहीं है उसने जेल में आत्महत्या कर ली थी, लेकिन उसके किए गए गुनाह आज भी फाइलों से बाहर निकलकर लोगों को डरा रहे हैं। यह रिपोर्ट दुनिया को यह बताने के लिए काफी है कि पर्दे के पीछे चमक-दमक वाली जिंदगी जीने वाले इन बड़े लोगों की दुनिया कितनी काली हो सकती है। फिलहाल, अभी और भी कई पन्नों का सामने आना बाकी है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नाम बेनकाब हो सकते हैं। दुनिया भर की नजरें अब अमेरिकी कोर्ट की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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