पूर्वांचल की ऐतिहासिक पौराणिक कालिनेमि वध स्थली विजेथुआ महाबीर धाम में दर्शन करने के लिए मंगलवार को श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। हर तरफ घंटों की गूंज के साथ जय बजरंग बली हनुमान, संकटमोचन कृपा निधान की आवाज सुनाई दे रही थी। नागपंचमी के बाद पड़ने वाले दूसरे मंगलवार को विजेथुआ महावीरन धाम में बुढ़वा मंगल मेला के रुप में मनाया जाता है। दूर – दराज से आने वाले दर्शनार्थियों के लिए प्रशासन की ओर से मेला परिसर के चारों तरफ छोटी बड़ी गाड़ियों का प्रवेश न हो इसके लिए वेरिकेटिंग बनाकर पुलिस के जवान तैनात किए गए थे।भोर से ही श्रद्धालुओं का आवागमन शुरू हुआ जो कि देर रात तक चलता रहा। श्रद्धालु भोर से ही मकरी कुण्ड सरोवर में स्नान करना शुरू कर दिए। दूर से आने वाले दर्शनार्थी मीठी पूड़ी,रोट,सिंदूर,माला – फूल, अगरबत्ती,लड्डू आदि के साथ कतार बद्ध हो लाइन में लगे रहे। मंदिर के पुजारी पंकज पांडेय ने बताया कि हजारों श्रद्धालुओं ने मत्था टेक आशीर्वाद लिया। दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए चौकी प्रभारी अभिषेक सिंह के नेतृत्व में सर्किल के थानों की पुलिस,महिला पुलिस बल सक्रिय रहे।
विजेथुआ महावीर धाम में स्थित मकरी कुण्ड सरोवर में मंगलवार व शनिवार को स्नान के बाद श्रद्धालु हनुमान जी का दर्शन पूजन करते हैं।कुछ स्नानार्थी सरोवर में लगे पोल पर चढ़कर स्टंटबाजी करते हैं। पूर्व में पोल पर चढ़कर कूदने से कई श्रद्धालुओं की मौत भी हो चुकी है।फिर भी प्रशासन बेखबर रहता है।पहले जैसी व्यवस्था न होने से दुकानदार हुए निराश -धाम में दूर दराज से आने वाले दुकानदारों ने बताया कि नाम का रह गया है बड़का, बुढ़वा मंगलवार, पहले जैसा बड़ा मंगलवार मेला अब नहीं होता।मेले में पहले मनोरंजन के लिए चिड़ियाघर,झूला,सर्कस व जादूगर आदि आते थे। बच्चों के साथ परिजन उसी में मस्त रहते थे।जिससे दिन भर मेला क्षेत्र में चहल-पहल रहता था।मेले में अब मनोरंजन के साधन नहीं आते, जिससे लोग हनुमान जी का दर्शन पूजन कर अपने गंतव्य को निकल जाते हैं। दर्शनार्थियों की भीड़ तो होती है। लेकिन मेला घूमने वालों की संख्या न के बराबर होती है। इससे बढ़िया तो ज्येष्ठ मास का मंगलवार रहता है।






