पश्चिम एशिया इस वक्त एक पूर्णकालिक और विनाशकारी युद्ध की आग में जल रहा है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) के बाद मिडिल ईस्ट के हालात पूरी तरह से बेकाबू हो चुके हैं। इस संयुक्त और अभूतपूर्व सैन्य कार्रवाई का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला घटनाक्रम यह है कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की राजधानी तेहरान में हुए हवाई हमले में मौत हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस ‘बड़े कॉम्बैट ऑपरेशन’ की पुष्टि करते हुए दावा किया है कि अब तक 48 से ज्यादा शीर्ष ईरानी नेताओं को खत्म किया जा चुका है और ईरान के 9 नौसैनिक जहाजों को भी तबाह कर दिया गया है। ट्रम्प के अनुसार, यह युद्ध अगले चार हफ्तों में समाप्त हो सकता है, लेकिन जब तक अमेरिका और इजरायल ईरानी शासन को उखाड़ फेंकने का अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर लेते, तब तक बमबारी जारी रहेगी।अपने शीर्ष नेता की मौत और अंडरग्राउंड मिसाइल ठिकानों पर हुए प्रचंड प्रहार के बाद ईरान ने भी अपनी पूरी ताकत के साथ पलटवार किया है। ईरानी सेना ने इजरायल के कई शहरों पर दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें और स्वार्म ड्रोन दागे हैं। ईरान ने अब इस युद्ध का दायरा बढ़ाते हुए कुवैत, बहरीन, कतर, जॉर्डन, इराक और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को भी सीधे निशाने पर ले लिया है। ताजा ग्राउंड रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुवैत में ईरानी मिसाइल हमले में 3 अमेरिकी सैनिकों की जान चली गई है और 5 गंभीर रूप से घायल हैं। वहां एक अमेरिकी एफ-15 लड़ाकू विमान के आसमान में आग लगने और क्रैश होने की तस्वीरें भी सामने आई हैं। इसके अलावा, ईरान ने सऊदी अरब की सबसे बड़ी अरामको तेल रिफाइनरी पर भी ड्रोन हमला किया है, जिसने पूरे खाड़ी क्षेत्र की संप्रभुता को खतरे में डाल दिया है।इस युद्ध ने अब एक खतरनाक वैश्विक रूप ले लिया है। एक तरफ जहां ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने खुलकर अमेरिका और इजरायल का समर्थन करते हुए अपने सैन्य बेस (जैसे साइप्रस बेस) के इस्तेमाल की इजाजत दे दी है, वहीं चीन और रूस जैसे देशों ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है। इस बीच, इजरायल ने दूसरा मोर्चा खोलते हुए लेबनान की राजधानी बेरूत में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर विनाशकारी हवाई हमले किए हैं। इजरायली सेना का दावा है कि उसने हिजबुल्लाह के संसदीय धड़े के प्रमुख मोहम्मद राड समेत कई कमांडरों को मार गिराया है।इस महायुद्ध का सीधा और सबसे खौफनाक असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है। यह वही समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। इसके कारण क्रूड ऑयल और सोने-चांदी की कीमतों में आग लग गई है। भारत के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। खाड़ी देशों में युद्ध फैलने से वहां रह रहे लाखों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है और ऊर्जा आयात बाधित होने से देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल की आशंका पैदा हो गई है। पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह युद्ध यहीं थमेगा या फिर तीसरे विश्व युद्ध का रूप ले लेगा।








