विजेथुआ धाम में आयोजित कथा कार्यक्रम के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज ने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम और माता सीता दोनों ही ब्रह्म स्वरूप हैं। उन्होंने कहा कि हमारे दर्शन में सीता और राम एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। सीता भी ब्रह्म हैं और राम भी ब्रह्म, दोनों एक ही तत्व के दो रूप हैं।उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि भगवान श्रीराम ने धर्म, मर्यादा और आदर्श जीवन की स्थापना की। श्रीराम का चरित्र यह सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म का पालन कैसे किया जाता है। वहीं माता सीता त्याग, स्नेह और पवित्रता की प्रतीक हैं। उनके जीवन से हमें सहनशीलता, संयम और प्रेम का संदेश मिलता है।रामभद्राचार्य जी ने कहा कि जब हम सीता और राम का एक साथ दर्शन करते हैं, तो वास्तव में हम ब्रह्म के ही दर्शन कर रहे होते हैं। सीता-राम की एकता ही सृष्टि का आधार है और उनका प्रेम परमात्मा और जीव के संबंध को दर्शाता है।इस अवसर पर मंच पर विवेक तिवारी सहित आयोजन समिति के सदस्य उपस्थित रहे। पूरे विजेथुआ धाम में भक्तों की भीड़ उमड़ी रही और “जय श्रीराम” के जयघोषों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।






