अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने फिर एक बार गाजा पे कब्जा करने की बात दोहराई 

गाजा में अब युद्धविराम के बाद इजरायल पर दबाव बनाने की कोशिश हो रही है कि वह सीजफायर को और आगे बढ़ाए। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने गाजा पे कब्जा करने की बात फिर दोहराई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने गाजा में जब से कब्जा करने की बात कही है तब से मध्य एशिया के देश उनसे नाराज हैं। उनमें कई अमेरिका के पुराने सहयोगी हैं। इसके बाद भी ट्रंप अपने वादे से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। इधर इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने आग में घी का काम किया है। उन्होंने कहा कि ट्रंप की योजना को लागू करने में वह पूरा जोर लगाएँगे। पीएम नेतन्याहू ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप का प्लान अमेरिकी सेना नहीं पूरा करेगी बल्कि यह काम इजरायल को ही करना होगा। पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की थी। लौटने के बाद वह अब सिक्योरिटी कैबिनेट की बैठक कर सकते हैं। वहीं दूसरे चरण के सीजफायर के लिए नेतन्याहू ने अपने अधिकारियों को कतर भेजा था। आपको बता दें इस डेलिगेशन में बड़े अधिकारी नहीं थे शामिल।

क्या कहा डोनाल्ड ट्रंप ने

रविवार 9 फरवरी को ट्रंप ने कहा, मैं गाजा पर कब्जा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हूं। मैं इसे खरीदना चाहता हूँ। हम चाहते हैं कि हमास की कभी गाजा में वापसी हीं ना हो। यहाँ वापस आने के लिए कुछ बचेगा ही नहीं। अब यहाँ बहुत कुछ ध्वस्त करने की जरूरत है। ट्रंप ने कहा, अरब देशों से बात के बाद वे फिलिस्तीनियों को बसाने को तैयार हो जाएँगे। ट्रंप ने कहा, वे गाजा में वापस जाना ही नहीं चाहते। उन्हें सुरक्षित जगहों पर बसाया जाएगा। वे गाजा में जाने की बात केवल इसलिए करते हैं क्योंकि उनके पास कोई विकल्प नहीं है। अगर उनके पास विकल्प होगा तो वे कभी गाजा नहीं जाना चाहेंगे। ट्रंप ने कहा, जिन बंधकों की वापसी हो रही है उन्हें देखकर ऐसा लगता है कि वे होलोकास्ट से निकलकर आए हैं। उन्हें देखने के बाद सब्र करना बेहद मुश्किल हो गया है। उनकी हालत बहुत खराब है। अब अपने वादे को पूरा करने में मैं ज्यादा समय नहीं ले सकता हूँ। इजरायल ने ट्रंप के इस विचार का समर्थन किया है। वहीं मिस्र ने ट्रंप की योजना को लेकर 27 फरवरी से अरब सम्मेलन बुला लिया है।

पिछले सप्ताह इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के साथ व्हाइट हाउस में हुई बैठक में ट्रंप केआर बाद दिए गए सुझाव से मिस्र, जॉर्डन और सऊदी अरब सहित अरब जगत नाराज हो गया है जो वाशिंगटन के प्रमुख सहयोगी हैं। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी और जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय दोनों ने गाजा में 18 लाख फलस्तीनियों को कहीं और बसाने और अमेरिका द्वारा उस क्षेत्र का स्वामित्व लेने के ट्रंप के आह्वान को खारिज कर दिया, लेकिन ट्रंप का दावा है कि वे अंततः इसे स्वीकार कर लेंगे। मिस्र के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी किए गए एक बयान में कहा गया है कि वह हाल के दिनों में अरब देशों में उच्चतम स्तर पर हुई वार्ता के बाद काहिरा में अरब लीग शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। जिसमें “फलस्तीन राज्य भी शामिल है, जिसने फलस्तीनी मुद्दे के लिए नए और खतरनाक घटनाक्रमों पर चर्चा करने के लिए शिखर सम्मेलन आयोजित करने का अनुरोध किया था”।

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