अयोध्या के इतिहास में आज का दिन स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। राम मंदिर निर्माण के पूर्ण होने के प्रतीक के रूप में आज जब मंदिर के 161 फीट ऊंचे शिखर पर धर्मध्वजा फहराई गई, तो उस ऐतिहासिक पल के साक्षी खुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बने।माहौल में एक अलग ही गंभीरता और दिव्यता थी। प्रधानमंत्री मोदी ने पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना के बाद अपने हाथों से विशाल भगवा ध्वज की डोरी खींची। जैसे-जैसे ध्वज ऊपर चढ़ता गया और शिखर पर हवा में लहराया, नीचे मौजूद हजारों लोगों का उत्साह चरम पर पहुंच गया। इस दौरान उनके साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत और यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी मौजूद रहीं।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर इस कार्य के पूर्ण होने का संतोष साफ देखा जा सकता था। वे लगातार व्यवस्थाओं का जायजा लेते रहे और प्रधानमंत्री के साथ हर कदम पर उपस्थित रहे। ध्वजारोहण के बाद प्रधानमंत्री ने हाथ जोड़कर प्रभु राम को नमन किया और वहां मौजूद संतों का आशीर्वाद लिया। मंदिर परिसर में ‘मोदी-योगी’ और ‘जय श्री राम’ के नारे एक साथ गूंज रहे थे, जो धर्म और सत्ता के इस अद्भुत संगम को बयां कर रहे थे।सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच, देश भर से आए विशिष्ट अतिथियों और संतों ने पुष्प वर्षा कर इस क्षण का स्वागत किया। यह ध्वज सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि उस संकल्प की सिद्धि का प्रमाण था जो वर्षों पहले लिया गया था। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की उपस्थिति ने इस आयोजन को न केवल धार्मिक बल्कि राष्ट्रीय गौरव का पर्व बना दिया। अयोध्या आज अपने राम के साथ-साथ अपने नेतृत्व को भी अपने बीच पाकर धन्य महसूस कर रही थी।






