प्रयागराज: महाकुंभ में संगम के जल की गुणवत्ता अब सवालों के घेरे में आ गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार गंगा और यमुना के पानी में फ़ीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मात्रा मानक से अधिक पाई गई है।
NGT की रिपोर्ट से जल निगम की हुई बोलती बंद
NGT की सुनवाई के दौरान यह रिपोर्ट सामने आई जिससे जल निगम के अपसरो की बोलती बंद हो गई है। NGT ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देशित किया कि श्रद्धालुओं को उस पानी की गुणवत्ता को लेकर जानकारी दे जहाँ वे डुबकी लगा रहे हैं। आपको बताते चले कि NGT ने दिसंबर 2024 में ही निर्देशित किया था कि महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में गंगा जल की पर्याप्त उपलब्धता रहनी चाहिए और ये जल नहाने योग्य और पीने के लिए सही होना चहिए।
सैंपल लेने का तरीका
सामान्य स्थिति में एक मिलीलीटर पानी में 100 बैक्टीरिया होना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार यह पता चला कि अमृत स्नान के ठीक एक दिन पहले यमुना नदी में फिकल कोलीफॉर्म 2300 और संगम के जल में 2000 पाया गया। इसी तरह टोटल फिकल कोलीफॉर्म 4500 है।
पानी में फिकल कोलीफॉर्म है बीमारियों का कारण
यदि किसी पानी में फिकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मात्रा मानक से ज्यादा है तो वह जल प्रयोग के लायक नहीं होता। यदि पानी पिया जाए तो शरीर के अंदर बीमारी बनती है और नहाने से त्वचा संबंधित रोगों का सामना भी करना पड़ सकता है।
आगे की स्थिति और भयावह हो सकती है
जिस तरह से यह बैक्टीरिया जल में बढ़ रहा है, इसके दुष्प्रभावी भाग जल के साथ भू- गर्भ जल स्तर तक पहुँच रहे हैं। आगे आने वाले दिनों में यह भू- गर्भ जल और प्रदूषित हो सकता है जो तमाम बीमारियों का कारण बन सकती हैं। समय रहते यदि स्थिति को कंट्रोल नहीं किया गया तो आगे की स्थिति और भी ज़्यादा भयावह हो सकती है और अफसरों के साथ-साथ जनता का भी इसमें सहयोग अत्यंत आवश्यक है।
-सत्यम गुप्ता








