चोरी का सामान बरामदगी के मामले में कोर्ट ने अजय मौर्य को दोषी ठहराते हुए सुनाई दो वर्ष के कारावास एवं एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा। भारतीय न्याय संहिता लागू होने के बाद सीजेएम ने पहला फैसला सुनाकर रचा इतिहास। जेल में ही मुल्जिम की कटती रही जिंदगी,नहीं मिल सकी जमानत और कोर्ट की सक्रियता से ट्रायल हो गया पूरा। करीब पांच माह पहले अज्ञात के खिलाफ दर्ज हुआ था चोरी का मुकदमामिली जानकारी के मुताबिक कोतवाली नगर क्षेत्र अंतर्गत बीते वर्ष नौ अक्टूबर के रात की घटना बताते हुए डॉ सुभाष चंद्र ने अपनी दो दुकानों में लगे ए.सी. के आउटडोर चोरी हो जाने के सम्बंध में अज्ञात के विरुद्ध दर्ज कराया था मुकदमा। कोतवाली पुलिस ने अज्ञात के विरुद्ध धारा-303(2) भारतीय न्याय संहिता में बीते 10 अक्टूबर को दर्ज किया था मुकदमा। तफ्तीश के दौरान विवेचक श्रीकृष्ण शुक्ल ने आरोपी अजय कुमार मौर्य पुत्र संतोष कुमार मौर्य निवासी देहली बाजार-एंजर थाना बल्दीराय का नाम प्रकाश में लाते हुए चोरी गया सामान बरामद कर बीते सात नवम्बर को की थी जेल भेजने की कार्रवाईविवेचक ने करीब 49 दिन में अपनी तफ्तीश पूरी कर आरोपी अजय मौर्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा-303(2) व 317(2) का अपराध बताते हुए कोर्ट में दाखिल कर दी थी चार्जशीट। दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए सीजेएम नवनीत सिंह की अदालत ने बीते चार दिसम्बर को पूरी कर दी थी आरोप विरचित करने की कार्यवाही, जिसके बाद 24 दिसम्बर से शुरू हुई अभियोजन साक्ष्य पेश करने की कार्यवाही। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष से ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी शैलेश चतुर्वेदी ने भी मामले में तत्परता दिखाते हुए वादी डॉ सुभाष चंद्र व विवेचक श्रीकृष्ण शुक्ल को परीक्षित कराने में नहीं की कोई देरीअभियोजन पक्ष ने अपने साक्ष्यों व तर्को को पेश करते हुए आरोपी अजय मौर्य को दोषी ठहराकर कड़ी सजा से दंडित किये जाने के लिए की मांग। वहीं बचाव पक्ष से पैरवी कर रहे चीफ लीगल एंड डिफेंस काउंसिल व असिस्टेंट लीगल एंड डिफेंस काउंसिल ने आरोपी अजय मौर्य को बेकसूर बताते हुए दोषमुक्त किये जाने के लिए की थी मांग। उभय पक्षो को सुनने के पश्चात सीजेएम नवनीत सिंह ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी अजय मौर्य को धारा-303(2) भारतीय न्याय संहिता यानी चोरी के अपराध में किया बरी। वहीं अदालत ने अजय मौर्य के पास से हुए चोरी के सामान बरामदगी के मामले में यानी भारतीय न्याय संहिता की धारा-317(2) में ठहराया दोषी। कोर्ट व अभियोजन पक्ष की सक्रियता से लागू हुए नये नियम की धारा में आये फैसले की चर्चाएं तेज।
विपुल पाण्डेय






