भारतीय संगीत जगत के सुनहरे अध्याय का आज एक दुखद अंत हो गया। अपनी जादुई आवाज़ और बेमिसाल वर्सटिलिटी से सात दशकों तक दुनिया को मंत्रमुग्ध करने वाली महान पार्श्व गायिका आशा भोंसले का आज निधन हो गया। वे 92 वर्ष की थीं।संगीत के एक युग का अवसानआशा जी के निधन की खबर मिलते ही कला, राजनीति और खेल जगत समेत पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। लता मंगेशकर जी के बाद संगीत के आकाश का दूसरा सबसे चमकता सितारा भी अब ओझल हो गया है। उनके जाने से पार्श्व गायन के क्षेत्र में जो शून्य पैदा हुआ है, उसे कभी भरा नहीं जा सकेगा।हजारों गानों में जिंदा रहेंगी ‘आशा’आशा भोंसले ने 20 से अधिक भाषाओं में लगभग 12,000 से ज्यादा गाने गाए थे। 1943 में अपना करियर शुरू करने वाली आशा जी ने शास्त्रीय संगीत से लेकर पॉप, गज़ल और भजन तक, हर विधा में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।प्रमुख फिल्में: ‘उमराव जान’, ‘तीसरी मंजिल’, ‘रंगीला’ और ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ जैसे हजारों फिल्मों को उन्होंने अपनी आवाज़ से अमर कर दिया।सम्मान: उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म विभूषण और दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।श्रद्धांजलिप्रधानमंत्री से लेकर बॉलीवुड के दिग्गज कलाकारों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। संगीत प्रेमियों का कहना है कि भले ही आज वह हमारे बीच नहीं रहीं, लेकिन उनकी आवाज़ की खनक आने वाली कई पीढ़ियों के कानों में हमेशा गूँजती रहेगी।”आशा जी सिर्फ एक गायिका नहीं, बल्कि एक संस्था थीं। उनकी ज़िंदादिली और संगीत के प्रति उनका समर्पण हम सभी के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
भारत रत्न की इस महान उत्तराधिकारी को भावभीनी श्रद्धांजलि।






