सुशीला कार्की ने नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री बनकर इतिहास रच दिया है। 73 वर्षीय कार्की, जो देश की पूर्व मुख्य न्यायाधीश भी रह चुकी हैं, एक अंतरिम सरकार का नेतृत्व करेंगी। काठमांडू के शीतल निवास में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।उनकी नियुक्ति राजनीतिक अस्थिरता के दौर के बाद हुई है, जब केपी शर्मा ओली को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। यह बदलाव युवाओं के नेतृत्व में हुए एक बड़े आंदोलन के बाद आया, जिसे ‘जेन-Z आंदोलन’ का नाम दिया गया। यह आंदोलन कथित भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के प्रयासों के खिलाफ था। प्रदर्शनकारियों की मांगों में से एक प्रमुख मांग प्रतिनिधि सभा को भंग करना था, जिसे कार्की की सिफारिश पर राष्ट्रपति पौडेल ने पूरा कर दिया। अब देश में 21 मार्च 2026 को नए संसदीय चुनाव होंगे।सुशीला कार्की को न्यायपालिका में उनकी ईमानदारी और भ्रष्टाचार विरोधी छवि के लिए जाना जाता है। वह नेपाल की पहली महिला प्रधान न्यायाधीश भी रह चुकी हैं। उनका चयन न केवल आंदोलनकारी युवाओं द्वारा किया गया, बल्कि उन्हें पारंपरिक राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिला। भारत ने भी सुशीला कार्की के नेतृत्व में बनी अंतरिम सरकार का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे देश में शांति और स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।








