सुलतानपुर जिले की धार्मिक आस्था का केंद्र — पौराणिक विजेथुआ महावीर धाम, जो अपने ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व के लिए जाना जाता है, वहाँ अब भक्तों के लिए एक नई व्यवस्था लागू की गई है।मंदिर प्रबंधन समिति ने निर्णय लिया है कि अब श्रद्धालु गर्भगृह में प्रवेश नहीं कर पाएंगे। भक्तों को अब हनुमानजी महाराज के दर्शन बाहर से ही करने होंगे।यह फैसला बढ़ती हुई भक्तों की भीड़, उनकी सुरक्षा, और मंदिर परिसर की पवित्रता को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।जानकारी के अनुसार, मंगलवार और शनिवार को यहाँ भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। भीड़ के कारण कई बार गर्भगृह में अव्यवस्था और धक्का-मुक्की की स्थिति बन जाती थी। इसको देखते हुए मंदिर प्रबंधन समिति ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि भक्त बाहर से ही दर्शन करें, जैसे काशी के संकटमोचन मंदिर और अयोध्या के हनुमानगढ़ी में व्यवस्था है।मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि यह कदम भक्तों की सुविधा और सुरक्षा के मद्देनजर उठाया गया है। इसके साथ ही मंदिर की मर्यादा, पवित्रता और स्वच्छता बनाए रखने के लिए भी यह आवश्यक था।गुरुवार को समिति की बैठक में अध्यक्ष विवेक तिवारी की अध्यक्षता में यह निर्णय पारित किया गया। इस अवसर पर मंदिर के पुजारियों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने भी अपनी सहमति जताई।स्थानीय श्रद्धालुओं और आगंतुक भक्तों ने इस नई व्यवस्था का स्वागत किया है। उनका कहना है कि मंदिर की परंपरा, मर्यादा और श्रद्धा को बनाए रखते हुए यह फैसला पूरी तरह उचित है।विजेथुआ धाम को बजरंगबली की तपोस्थली माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यहीं पर महाबली हनुमानजी ने कालनेमि राक्षस का वध किया था। इसी कारण यह स्थान भक्तों के लिए अत्यंत पूजनीय माना जाता है। प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु यहाँ दर्शन-पूजन के लिए पहुँचते हैं, और दीपावली, हनुमान जयंती व सावन के विशेष अवसरों पर यहाँ लाखों की संख्या में भीड़ उमड़ती है।मंदिर समिति ने बताया कि आने वाले दिनों में भक्तों की सुविधाओं के लिए विशेष प्रबंध भी किए जाएंगे — जिसमें दर्शन के लिए अलग कतार व्यवस्था, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और श्रद्धालुओं के लिए विश्राम स्थल की व्यवस्था शामिल है।






