सुलतानपुर। उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को ‘विश्वस्तरीय’ बनाने के बड़े-बड़े दावों की पोल सुलतानपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज में खुलती नजर आ रही है। जहाँ मरीजों को बेहतर इलाज का सपना दिखाकर करोड़ों के बजट ठिकाने लगाए जा रहे हैं, वहीं हकीकत यह है कि यहाँ मरीजों को एक्स-रे की असली ‘फिल्म’ के बजाय साधारण A4 साइज फोटोकॉपी पेपर पर रिपोर्ट थमाई जा रही है।मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने आ रहे गरीब मरीजों का आरोप है कि घंटों लाइन में लगने के बाद जब एक्स-रे होता है, तो उन्हें हाथ में एक कागज का टुकड़ा पकड़ा दिया जाता है। डॉक्टरों का मानना है कि कागज पर प्रिंट किए गए एक्स-रे में बारीकियां साफ नहीं दिखतीं, जिससे हड्डी में फ्रैक्चर या अन्य गंभीर समस्याओं को पकड़ पाना मुश्किल होता है। ऐसे में मरीज को मजबूरन बाहर के प्राइवेट सेंटरों पर जाकर मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है।सरकार के दावों पर करारा तमाचा एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और स्वास्थ्य मंत्री सूबे की चिकित्सा व्यवस्था को डिजिटल और अत्याधुनिक बनाने का दम भरते हैं, तो दूसरी तरफ सुलतानपुर मेडिकल कॉलेज की यह तस्वीर “डबल इंजन” की रफ्तार पर ब्रेक लगाती दिख रही है।बड़ा सवाल: क्या प्रशासन के पास एक्स-रे फिल्म खरीदने तक का बजट नहीं है? या फिर बजट की बंदरबांट में मरीजों की जान दांव पर लगा दी गई है? प्रशासनिक चुप्पी और बदहाली अस्पताल प्रशासन इस मामले पर फिलहाल ‘रटा-रटाया’ जवाब दे रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि यह लापरवाही सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन है। बिना फिल्म के एक्स-रे रिपोर्ट देना न केवल तकनीकी रूप से गलत है, बल्कि यह उन वादों की भी खिल्ली उड़ाता है जिसमें ‘मुफ्त और उच्च गुणवत्ता’ वाले इलाज की बात कही गई थी।अब देखना यह होगा कि इस खबर के बाद शासन-प्रशासन की कुंभकर्णी नींद टूटती है या सुलतानपुर के मरीज यूँ ही ‘कागज के टुकड़ों’ के सहारे अपनी किस्मत ढूँढते रहेंगे।






