28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) के तहत एक व्यापक और चौंकाने वाले सैन्य अभियान की शुरुआत की। इस साझा हमले का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को निष्क्रिय करना और ईरानी सत्ता में बदलाव लाना था। युद्ध के पहले ही दिन हुए हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई शीर्ष ईरानी अधिकारियों की मृत्यु हो गई, जिसने पूरे मध्य पूर्व की गतिशीलता को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया है।ईरान का भीषण पलटवार:शीर्ष नेतृत्व के नुकसान के बावजूद, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने तुरंत कमान संभाली और एक बड़ा पलटवार किया। ईरान ने इजरायल के साथ-साथ बहरीन, जॉर्डन, यूएई और इराक में स्थित दर्जनों अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हजारों ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। दोनों तरफ से हो रहे इन हमलों में अब तक हजारों सैन्य कर्मियों और नागरिकों की जान जा चुकी है। इजरायल और अमेरिका लगातार ईरान के मिसाइल लॉन्चर्स, वायु सेना अड्डों और आंतरिक सुरक्षा ढांचे को नेस्तनाबूद करने में लगे हुए हैं।वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रहार (हर्मुज जलडमरूमध्य का संकट):इस अंतरराष्ट्रीय महायुद्ध का सबसे खतरनाक पहलू आर्थिक है। ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्ग, हर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है। इसके साथ ही खार्ग द्वीप (Kharg Island) जैसे महत्वपूर्ण ईरानी तेल केंद्रों पर अमेरिकी हमलों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को पंगु बना दिया है। इसके परिणामस्वरूप वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) और गैस की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल आया है, और शेयर बाजार भारी अस्थिरता का सामना कर रहे हैं।भारत पर प्रभाव और सरकार का रुख:दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक के रूप में भारत के लिए यह भू-राजनीतिक संकट बेहद चुनौतीपूर्ण है। हालांकि भारतीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और देश में कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है, लेकिन सप्लाई चेन बाधित होने से एलपीजी और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है। भारतीय जहाज सुरक्षित मार्गों की तलाश कर रहे हैं और सरकार नागरिकों से पैनिक बाइंग (घबराहट में खरीदारी) न करने की अपील कर रही है। भारत कूटनीतिक रूप से भी इस तनाव को कम करने और सुरक्षित नेविगेशन के पक्ष में अपनी आवाज उठा रहा है।वर्तमान कूटनीतिक गतिरोध:फिलहाल युद्धविराम की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में बयान दिया है कि वह वर्तमान शर्तों पर ईरान के साथ किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं हैं। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दुनिया को चेतावनी दी है कि यह युद्ध पूरे पश्चिमी एशिया को अपनी चपेट में ले लेगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय देश, इस विनाशकारी युद्ध को रोकने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।








