भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौता (TEPA), जो मुक्त व्यापार समझौता (FTA) है, 1 अक्टूबर 2025 से आधिकारिक तौर पर लागू हो गया है। EFTA में स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन जैसे चार देश शामिल हैं।इस समझौते का मुख्य आकर्षण EFTA देशों द्वारा 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर (लगभग 8.86 लाख करोड़ रुपये) के निवेश की प्रतिबद्धता है, जिससे भारत में लगभग 10 लाख नई नौकरियां सृजित होने की उम्मीद है। यह निवेश प्रतिबद्धता किसी भी भारतीय FTA में पहली बार की गई है।व्यापार के मोर्चे पर, EFTA ने भारत के लगभग 99.6 प्रतिशत निर्यात (92.2 प्रतिशत टैरिफ लाइनों) पर शुल्क समाप्त करने या कम करने की पेशकश की है, जिससे भारत के वस्त्र, इंजीनियरिंग सामान, समुद्री उत्पाद, कॉफी और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के लिए प्रीमियम यूरोपीय बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी। वहीं, भारत ने EFTA के 95.3 प्रतिशत निर्यात (82.7 प्रतिशत टैरिफ लाइनों) पर शुल्क उदार बनाया है। इसके परिणामस्वरूप भारत में स्विस घड़ियों, चॉकलेट, वाइन, जैतून का तेल, और कुछ चिकित्सा उपकरणों जैसे उत्पादों पर सीमा शुल्क धीरे-धीरे कम या समाप्त हो जाएगा, जिससे वे उपभोक्ताओं के लिए सस्ते होंगे।समझौते में भारत के संवेदनशील क्षेत्रों जैसे डेयरी, सोया, कोयला, फार्मा और चिकित्सा उपकरणों को टैरिफ रियायतों से बाहर रखकर सुरक्षा प्रदान की गई है। इसके अलावा, EFTA से भारत का सबसे बड़ा आयात सोना है, जिसकी प्रभावी ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह समझौता सेवाओं (जैसे आईटी, शिक्षा, और ऑडियो-विजुअल) के निर्यात को बढ़ावा देने और दोनों पक्षों के बीच निवेश और व्यापार को बढ़ाने के लिए एक स्थिर और अनुमानित ढांचा प्रदान करता है। समझौते के तहत, निवेश के सुचारू प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए एक समर्पित भारत–EFTA डेस्क भी कार्यशील है। इस समझौते को ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूत करने और वैश्विक व्यापार एकीकरण में भारत की स्थिति को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सलमान शेख








