SCO (Shanghai Cooperation Organisation) बैठक की में क्या-क्या है मुख्य बातें?

Tianjin में हुई 25वीं शिखर बैठक में सदस्य देशों ने आतंकवाद पर कड़ी निंदा, आर्थिक-सहयोग की नई रूपरेखा, और वैकल्पिक वैशिक शासन की दिशा में पहलें तेज़ कीं; चीन–रूस ने नई विकास बैंक की पैरवी की, जबकि भारत ने अपनी तीन-स्तंभीय प्राथमिकताएँ—Security, Connectivity, Opportunity—दोहराईं।

मुख्य परिणाम

Tianjin Declaration में आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ समन्वित कार्रवाई और “डबल स्टैंडर्ड” न मानने पर जोर दिया गया, साथ ही सीमापार आतंकवाद की रोकथाम और आतंकी वित्तपोषण पर सख्ती का संदेश दिया गया।2026–2035 के लिए SCO Development Strategy और 2026–2030 के लिए उग्रवादी विचारधारा-रोधी कार्यक्रम को मंजूरी मिली, जिससे व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी और सुरक्षा सहयोग की दीर्घकालिक दिशा तय हुई। सदस्य देशों ने एक संभावित SCO Development Bank पर परामर्श तेज़ करने पर सहमति जताई; चीन ने 2 अरब RMB अनुदान और 10 अरब RMB ऋण की पेशकश कर वित्तीय समर्थन का संकेत दिया।

अर्थव्यवस्था और ऊर्जा

व्यापार बाधाएँ घटाने, निवेश प्रवाह बढ़ाने और क्षेत्रीय वैल्यू-चेन विकसित करने पर जोर देकर आंतरिक SCO व्यापार को मज़बूत करने की योजना रखी गई। ऊर्जा आपूर्ति शृंखलाओं की स्थिरता, टिकाऊ ऊर्जा और 2030 तक की ऊर्जा सहयोग रोडमैप को आगे बढ़ाने पर सहमति हुई।

प्रौद्योगिकी और AI

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल अर्थव्यवस्था में सहयोग बढ़ाने, AI जोखिमों को घटाने और जिम्मेदार उपयोग के लिए सहयोगी ढाँचे और केंद्र स्थापित करने पर बल दिया गया। “समान अधिकारों” के सिद्धांत के साथ AI विकास और ओपन-सोर्स मॉडल्स को बढ़ावा देने की बात दोहराई गई।

भारत की भूमिका

प्रधानमंत्री ने सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर के तीन स्तंभ दोहराए; आतंकवाद पर जीरो-टॉलरेंस, आतंक वित्तपोषण के विरुद्ध कदम, और सीमापार आतंकवाद को उखाड़ने की अपील की। चाबहार पोर्ट और INSTC जैसी कनेक्टिविटी पहलों का समर्थन, स्टार्टअप/इनोवेशन और सिविलाइज़ेशनल डायलॉग फोरम का प्रस्ताव रखा गया।

भू-राजनीतिक संदर्भ

चीन और रूस ने “वास्तविक बहुध्रुवीयता” और अमेरिकी प्रभाव-केन्द्रित व्यवस्थाओं के विकल्प के रूप में SCO ढाँचे को प्रोत्साहन दिया; एक “न्यायसंगत और संतुलित वैश्विक शासन” की पैरवी की। शिखर बैठक के दौरान भारत–चीन शीर्ष नेताओं की मौजूदगी और संदेशों ने संबंध-सुधार की संभावनाओं और सीमा-मुद्दों पर संवाद की जरूरत दोनों को रेखांकित किया।

सदस्यता और साझेदारी

SCO का आकार बढ़ता रहा; 2025 में लाओस को पार्टनर स्टेटस दिया गया, जिससे संवाद और साझेदारियों का दायरा विस्तृत हुआ। संगठन ने संयुक्त राष्ट्र और WTO सिद्धांतों के अनुरूप बहुपक्षवाद का समर्थन करते हुए एकतरफा प्रतिबंधों और दबाव-नीतियों का विरोध दर्ज किया।

चुनौतियाँ और गतिशीलताएँ

अलग-अलग राष्ट्रीय हित, सीमा विवाद और बाहरी शक्तियों से संबंधों की विविधता के कारण सर्वसम्मति-आधारित निर्णय-प्रक्रिया अक्सर धीमी रहती है; व्यापार असंतुलन विशेषकर चीन-केंद्रित व्यापार से जुड़ी चिंताएँ बनी हुई हैं। भारत–पाकिस्तान के फॉग-ऑफ-वार जैसे रिश्तों के चलते प्रतीकों/संकेतों की राजनीति शिखर बैठक की सुर्खियों का हिस्सा रही।

आयोजन और समयरेखा

25वीं SCO शिखर बैठक 31 अगस्त–1 सितंबर 2025 को तिआनजिन, चीन में आयोजित हुई; यह SCO के इतिहास की सबसे बड़ी बैठकों में से एक बताई गई। चीनी अध्यक्षता 2024–2025 काल की पराकाष्ठा इस बैठक से हुई; 2025–2026 के लिए नई अध्यक्षता को हस्तांतरण का औपचारिक चरण संपन्न हुआ।

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