जले नोटों से विवादों में घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा के इलाहाबाद हाईकोर्ट तबादले पर विरोध जारी है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की सिफारिश पर न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के ट्रांसफर को मंजूरी दे दी है। अब वे दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट जाएंगे, जो उनका मूल कार्यक्षेत्र है। यह फैसला एक विवाद के बीच लिया गया, जिसमें उनके सरकारी आवास में आग लगने के बाद बड़ी मात्रा में कैश मिलने की खबर आई थी।
कैश कांड से विवादों में आए जस्टिस यशवंत वर्मा के इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर होने पर विरोध जारी है। इसी बीच जस्टिश यशवंत वर्मा के शपथ ग्रहण का इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने खुलकर किया विरोध। इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने अपनी माँगों को लेकर हड़ताल जारी रखने का ऐलान किया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल तिवारी ने कहा, 28 मार्च (2025) भारतीय न्याय व्यवस्था का सबसे काला दिन है। ‘भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहा एक व्यक्ति इलाहाबाद हाईकोर्ट में शपथ लेने जा रहा है’। आज एक आम आदमी यह सवाल पूछ रहा है कि जो व्यक्ति दिल्ली में अपनी शपथ पर खरा नहीं उतर सका, वह इलाहाबाद में ऐसा करेगा?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े कैश कांड मामले में आंतरिक जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय पैनल में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शील नागू, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी एस संधावालिया और कर्नाटक उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति अनु शिवरामन शामिल हैं। यह जाँच संविधान के तहत महाभियोग की प्रक्रिया से अलग है।








